“अष्क के नाटकों में मध्यवर्गीय सामाजिक जीवन का परिदृष्य आराधना सारवान परिवार से लेकर विश्वव्यापी मानव समूह तक को समाज की संज्ञा दी जाती है। समाज एक व्यापक अभिव्यंजना है। अरस्तू का कहना है कि-‘‘समाज का निर्माण जीवन के निमित्त किया गया है। यद्यपि समाज सुन्दर”. Leadership, Education, Personality: An Interdisciplinary Journal, ISSN: 2524-6178 9, no. 12 (March 2, 2025): 56–60. Accessed September 9, 2026. https://sibe.rpress.co.in/index.php/jimr/article/view/679.