आचार्य महावीर प्रसाद शर्मा विरचित ‘‘मांगेरामचरितम्’’ महाकाव्य में अलंकार - योजना एक विमर्श

Authors

  • डॉ. जगदीश आचार्य सतीश कुमार Author

DOI:

https://doi.org/10.1366/t43a7962

Abstract

काव्यशास्त्र मर्मज्ञ आचार्यों ने काव्य के कला पक्ष के उत्कर्षवर्धन के लिए अलंकारों का प्रयोग अत्यधिक आवश्यक माना है अग्निपुराण में वेदव्यास जी ने  कहा है कि अलंकार रहित काव्य विधवा स्त्री के समान होता है। प्रस्तुत महाकाव्य ‘मांगेरामचरितम्’ में आचार्य महावीरप्रसादशर्मा ने तीनों प्रकार के अलंकारों (शब्दालंकार, अर्थालंकार तथा उभयालंकार) का सम्यक् प्रयोग किया है। कविवर ने शब्दालंकारों के अन्तर्गत अनुप्रास अलंकार का प्रयोग तथा अर्थालंकारों के अन्तर्गत उपमा, उत्प्रेक्षा, रूपक, स्वभावोक्ति, अर्थान्तरन्यास, लोकोक्ति तथा संसृष्टि आदि अलंकारों का प्रयोग कर अपने ज्ञान का विशेष रूप से प्रयोग किया है। आचार्य महावीरप्रसादशर्मा की अलंकार योजना विषयानुकूल तथा सहजभाव से युक्त है जिसके द्वारा आचार्य जी ने महाकाव्य में काव्यशोभा का वर्धन किया है आचार्य महोदय ने प्रस्तुत महाकाव्य में अलंकारों के प्रयोग करने के समय पांडित्य प्रदर्शन न करके अपने महाकाव्य के सौन्दर्यवर्धन हेतु बड़ी सहजता एवं सरलतानुसार विषयानुकूल ही अलंकारों का प्रयोग किया है। प्रस्तुत महाकाव्य में प्रयुक्त अलंकार सहजता से बोधगम्य होकर महाकाव्य के रसपान करने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। 

Published

2006-2025

Issue

Section

Articles

How to Cite

आचार्य महावीर प्रसाद शर्मा विरचित ‘‘मांगेरामचरितम्’’ महाकाव्य में अलंकार - योजना एक विमर्श. (2025). Leadership, Education, Personality: An Interdisciplinary Journal, ISSN: 2524-6178, 18(12), 208-218. https://doi.org/10.1366/t43a7962