भारतीय संघवाद का बदलता स्वरूप

Authors

  • मोनिका चोपड़ा and प्रोफेसर सुनीता तिवारी Author

DOI:

https://doi.org/10.1366/mcjpb040

Abstract

भारतीय संविधान का संघीय चरित्र इसकी प्रमुख विशेषताओं में से एक है। भारत मंे केन्द्रीय और राज्य सरकारों की उपस्थिति और कार्याें का स्पष्ट विभाजन संघात्मक ढांचे का आधार है। हांलाकि भारतीय संविधान में कही भी संघवाद शब्द का प्रयोग नहीं किया गया हैं, बल्कि इसके स्थान पर भारत को ‘राज्यों के संघ’ के रूप में संबोधित किया गया है। जिसका तात्पर्य है कि भारतीय राज्यों को संघ से पृथक होने की शक्ति नहीं है। स्वतंन्त्रता प्राप्ति के बाद के प्रारंभिक दशकों में जब हम संघीय संरचना की बात करते है तो उसमें केन्द्र शीर्ष पर होता था और राज्य अधीनस्थ, पूर्ववर्ती योजना आयोग की कार्यपद्धति भी ऐसी ही थी। योजना आयोग ने विकास की राह दिखाने के लिए वित्तीय साधनों को प्राथमिक माना तथा पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से विकास गतिविधियों को क्रियान्वित किया। इस माॅडल में राज्यों की निर्णयन में भागीदारी न के बराबर थी। केन्द सरकार देश में विकास गतिविधियों का निर्णय स्वयं करती थी। इसका समग्र परिणाम यह हुआ कि भारत का संघीय चरित्र केन्द्र की और अत्यधिक झुका रहा। 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद राज्यों की स्वायत्तता की मांग उठने लगी। इस दिशा में कुछ परिवर्तन और विकास प्रक्रिया, निर्णयन में राज्यों को भागीदार बनाने तथा सहयोगात्मक संघवाद की और तो बढ़ा किन्तु संरचनात्मक ढ़ांचे में परिवर्तन न होने से इस और विकास कम हुआ। हालांकि बढ़ती जन जागृति के कारण राजनीतिक हस्तक्षपों में कमी आई, साथ ही गठबंधन सरकारों के दौर में राज्यों का महत्व बढ़ गया। 2015 में नीति आयोग के निर्माण के बाद भारतीय संघवाद मे आमूलचूल परिवर्तन देखा जा रहा है। नीति आयोग अपने पूर्ववर्ती योजना आयोग से भिन्न माॅडल पर कार्य कर रहा है। यह वित्त प्रदाता के स्थान पर एक थिंक टैंक के रूप में कार्य करता है और निर्णयन प्रक्रिया में राज्यों को भी शामिल किया जा रहा है। केन्द्र सरकार न केवल सहयोगी भूमिका में है बल्कि अवसरंचना विकास कैसे कार्याे द्वारा राज्यों के विकास को गति दे रही है। संघवाद में एक नई प्रवृति के रूप में रूप में प्रतिस्पद्र्धात्मकता को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब लोग भी अपनी सरकारों के कार्याें का मूल्यांकन कर रहे है। जिससे सरकारों पर कार्य करने का दबाव बढ़ गया है। वर्तमान में भारतीय संविधान विकासशील संघवाद की और प्रवृत्त होता जा रहा है।

Published

2006-2025

Issue

Section

Articles

How to Cite

भारतीय संघवाद का बदलता स्वरूप. (2024). Leadership, Education, Personality: An Interdisciplinary Journal, ISSN: 2524-6178, 19(1), 332-338. https://doi.org/10.1366/mcjpb040