ज्ञानमार्ग और प्रेममार्ग : विभाजन की पड़ताल
DOI:
https://doi.org/10.1366/e8frw092Abstract
निर्गुण भक्ति कविता को सामान्यत: ज्ञानमार्गी और प्रेममार्गी दो धाराओं में विभाजित करके देखा जाता है । लेकिन, यह परम्परा बहुत पुरानी नहीं दिखाई पड़ती । नाभादास ने अपने भक्तमाल में जायसी जैसे महाकवि को भी स्थान नहीं दिया है । जिन्हें आज की शब्दावली में प्रेममार्गी कहते हैं उन्हें भक्त कहने की आवश्यकता भी नाभादास को नहीं पड़ी । अत: ज्ञानमार्ग और प्रेममार्ग का विभाजन बिलकुल आधुनिक निर्मिति है । आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने ‘हिन्दी साहित्य का इतिहास’ पुस्तक में भक्ति की निर्गुणधारा को दो शाखाओं में विभक्त किया-- ज्ञानाश्रयी शाखा और प्रेममार्गी शाखा



