हरियाणा में दलित महिलाओं के उत्थान के लिए लागू की गई सरकारी नीतियों और कार्यक्रमों का विश्लेषणात्मक अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.1366/wtf5mc73Abstract
2011 की जनगणना के अनुसार हरियाणा की कुल जनसंख्या 2.54 करोड़ थी और इस कुल जनसंख्या में से लगभग पांचवां हिस्सा दलित वर्ग का है। राज्य में लगभग 24 लाख दलित वर्ग की महिलाएँ निवास करती है। दलित वर्ग जिसे संवैधानिक तौर पर अनुसूचित जाति कहा जाता है इस वर्ग के लिए शुद्र, दलित, बाहरी जाति और अछूत शब्दों का प्रयोग किया जाता है। दलित वर्ग की महिलाएँ समाज में जाति, वर्ग व लिंग के आधार पर समाज के अंतर्गत किए गए जातिगत विभाजन की समस्याओं से सबसे ज़्यादा प्रभावित और उत्पीड़ित होती है समाज के इस वर्ग को जाति, लिंग व ग़रीबी के कारण हिंसा का सामना करना पड़ता है हरियाणा राज्य में दलित महिलाओं के ख़िलाफ़ बलात्कार, यौन उत्पीड़न, अपहरण जैसे अपराध काफ़ी संख्या में होते हैं। राज्य में दलित वर्ग की अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण इलाकों में रहते हैं ग़रीबी के कारण उनकी पहुँच बुनियादी सुविधाओं तक ही नहीं होती हैं। दलित वर्ग की महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त होने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है भारत सरकार व हरियाणा सरकार के द्वारा दलित महिलाओं के उत्थान के लिए अनेक नीतियों और योजनाओं को लागू किया गया है जिससे दलित महिलाओं की स्थिति में कुछ हद तक सुधार हुआ है शोध पत्र में हरियाणा राज्य में दलित महिलाओं की स्थिति और भारत सरकार व हरियाणा सरकार द्वारा दलित महिलाओं के उत्थान के लिए लागू की गई नीतियों और कार्यक्रमों का विश्लेषणात्मक अध्ययन किया जाएगा।



