नकली किन्नरों के जाल में फंसी अभिशप्त देह की व्यथा
DOI:
https://doi.org/10.1366/5tkz6c96Abstract
समाज में घटित विभिन्न घटनाओं, संघर्ष एवं परिस्थितियों से सम्बन्धित विषयों को साहित्य जगत ने अपनाया । उस पर उपन्यास, कहानी, नाटक इत्यादि विधाओं के अनुरूप लिखा गया किन्तु प्राचीनकाल से ही एक विषय अछूता रहा । यह विडम्बना ही रही कि जिस वर्ग को समाज ने सदैव हाशिए पर धकेलकर रखा साहित्य ने भी उसे दरकिनार कर दिया । 21वीं सदी में किन्नर विमर्श दो दीए भर प्रकाश दिखाया गया । जिसकी रोशनी में धीरे-धीरे ही सही अपितु लगातार इस विषय पर लिखा जा रहा है । इसी कड़ी में किन्नरों के घर परिवार में बहिष्कृत जीवन का यथार्थ चित्रण करता ‘किन्नर कथा’ उपन्यास साहित्य में महत्त्वूर्ण भूमिका निभाता है । ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर रचित उपन्यास थर्ड जेंडर के दर्द, संघर्ष और व्यथा को प्रस्तुत करता है ।



