नकली किन्नरों के जाल में फंसी अभिशप्त देह की व्यथा

Authors

  • डाॅ॰ हरिओम फुलिया Author

DOI:

https://doi.org/10.1366/5tkz6c96

Abstract

    समाज में घटित विभिन्न घटनाओं, संघर्ष एवं परिस्थितियों से सम्बन्धित विषयों को साहित्य जगत ने अपनाया । उस पर उपन्यास, कहानी, नाटक इत्यादि विधाओं के अनुरूप लिखा गया किन्तु प्राचीनकाल से ही एक विषय अछूता रहा । यह विडम्बना ही रही कि जिस वर्ग को समाज ने सदैव हाशिए पर धकेलकर रखा साहित्य ने भी उसे दरकिनार कर दिया । 21वीं सदी में किन्नर विमर्श दो दीए भर प्रकाश दिखाया गया । जिसकी रोशनी में धीरे-धीरे ही सही अपितु लगातार इस विषय पर लिखा जा रहा है । इसी कड़ी में किन्नरों के घर परिवार में बहिष्कृत जीवन का यथार्थ चित्रण करता ‘किन्नर कथा’ उपन्यास साहित्य में महत्त्वूर्ण भूमिका निभाता है । ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर रचित उपन्यास थर्ड जेंडर के दर्द, संघर्ष और व्यथा को प्रस्तुत करता है ।

Published

2006-2025

Issue

Section

Articles

How to Cite

नकली किन्नरों के जाल में फंसी अभिशप्त देह की व्यथा. (2025). Leadership, Education, Personality: An Interdisciplinary Journal, ISSN: 2524-6178, 17(9), 75-78. https://doi.org/10.1366/5tkz6c96