कांगड़ा जनपद में विवाह की रस्में और लोकगीत: एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विश्लेषण (मध्यकालीन समय से लेकर आज तक)

Authors

  • डॉ. प्रमोद कुमार, श्री सुरेश कुमार, Author

DOI:

https://doi.org/10.1366/6xsmzy88

Abstract

इस शोध पत्र में काँगड़ा क्षेत्र की विवाह परंपराओं और लोक गीतों की समृद्धि और महत्व का विश्लेषण किया गया है। काँगड़ा का भौगोलिक और सांस्कृतिक परिपेक्ष्य विवाह संस्कारों और उनके साथ जुड़ी रस्मों को विशिष्ट बनाता है। इस क्षेत्र में विवाह केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिसमें लोक गीतों का अहम स्थान होता है।

 

शोध पत्र में विशेष रूप से विवाह गीतों के विभिन्न प्रकारों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जैसे विवाह पूर्व गीत, जो मंगनी और मेहंदी के समय गाए जाते हैं। इन गीतों में विवाह की खुशी और रीति-रिवाजों का उत्सवात्मक रूप से वर्णन किया जाता है। इसके बाद विवाह संस्कार के गीत आते हैं, जो फेरे, वरमाला और अन्य रस्मों के समय गाए जाते हैं, जिनसे विवाह की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को दर्शाया जाता है। अंत में, विदाई गीतों का उल्लेख किया गया है, जो नववधू के घर से विदा होने पर गाए जाते हैं और यह भावनाओं का गहरा प्रतिबिंब होते हैं।

Published

2006-2025

Issue

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Articles

How to Cite

कांगड़ा जनपद में विवाह की रस्में और लोकगीत: एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विश्लेषण (मध्यकालीन समय से लेकर आज तक). (2024). Leadership, Education, Personality: An Interdisciplinary Journal, ISSN: 2524-6178, 18(6), 256-262. https://doi.org/10.1366/6xsmzy88