रामचरितमानस में तुलसीदास के विचारों की भ्ूामिका पूजा शर्मा डाॅ0 ज्योति यादव
DOI:
https://doi.org/10.1366/s61p9n68Abstract
तुलसीदास का रामचरितमानस कई विचार धाराओं का संगम हैः सांस्कृतिक विचारधारा, आध्यात्मिक विचारधारा, सामाजिक विचारधारा, नैतिकविचारधारा, आर्थिक विचारधारा, राजनीतिक विचारधारा इत्यादि। इन विचारधाराओं की चर्चा कहीं न कहीं इस प्रबंध में की गयी है इसीलिए इन विचार धाराओं की विस्तृत चर्चा इस स्थल पर विशेष प्रयोजन मूलक नहीं लगती। मैंने इन विचारधाराओं को सिर्फ दो भागों में विभक्त किया है। ईश्वर, जीव, माया, जीव आदि की मैंने आध्यात्मिक विचारधारा के अन्दर समेट लिया है और राजा प्रजा, पिता - पुत्र, भाई - बहन, गुरु - शिष्य, शत्रु - मित्र, घर- परिवार, आदि के संबंधो को लेकर गोस्वामी जी जो विचार व्यक्त किए हैं उन्हे सामाजिक विचार धारा में रखा गया है। यदि उन दोनों विचार धाराओं का सम्यक अध्ययन कर लिया जाय तो हम तुलसी की विचारधारा से संबंधित अनेक जिज्ञासाओं को शान्त कर सकते हैं।



