सामाजिक उŸारदायित्व के निर्वाहन में बालिकाओं की शिक्षा का प्रभाव, समाज के शिक्षित परिवेश के सन्दर्भ में

Authors

  • अन्नपूर्णा डाॅ0 वीरपाल कौर Author

DOI:

https://doi.org/10.1366/9s012r52

Abstract

    आधुनिक शिक्षा का आरम्भ 19वी शताब्दी में 1813 ई0 के चार्टर एक्ट के साथ स्वीकार किया जाता है मध्यकालीन स्त्रियो की स्थिती अत्यधीक दयनीय थी इनका पूर्व शोषण हो रहा था इसी शोषण के विरूद्ध 19 वीं शताब्दी में सामाजीक सुधार एंव राष्ट्रीय आन्दोलन प्रारम्भ हुआ स्वामी विवेकानन्द के अनुसार महिलाएं समाज के कडे प्रतिबन्धो में जकड़ दी गयी है मनुष्य नारी को मात्र एक उत्पादक मशीन की तरह इस्तेमाल करता था। यदि नारी को जो एक सजीव रूप थी, ऊपर नही उठाया गया तो समाज कभी भी ऊपर नही उठ सकता समाज के कुछ बुद्धजीवियो ने स्त्रियो की गिरती हुई दशा को सुधारने का कार्य किया उसमें राजा राममोहन राय, स्वामी विवेकानन्द, स्वामी दयानन्द सरस्वती के प्रयासों ने बाल विवाह पुर्नविवाह अधिनियम पारित हुआ बंगाल में ईश्वरचन्द विधासागर तथा पूना में प्रो० कार्वे के प्रयासो से विधवा को शिक्षा देने के लिए आश्रम खोले गये तथा विधवा को प्रोत्साहन दिया गया। 

Published

2006-2025

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Articles

How to Cite

सामाजिक उŸारदायित्व के निर्वाहन में बालिकाओं की शिक्षा का प्रभाव, समाज के शिक्षित परिवेश के सन्दर्भ में . (2024). Leadership, Education, Personality: An Interdisciplinary Journal, ISSN: 2524-6178, 18(6), 355-360. https://doi.org/10.1366/9s012r52