‘‘नारी चेतना पर विमर्श, मन्नू भंडारी कृत रचनाओं के सन्दर्भ में’’

Authors

  • जयकरण सिंह चारण डाॅ0 अंजू Author

DOI:

https://doi.org/10.1366/4gjsyy91

Abstract

सृष्टि के विकास में नारी का बहुत बड़ा उत्तरदायित्व रहा है। शाक्तों की आराध्या जगन्माता महामाया महिला स्वरूप है। शाक्तदर्शन के अनुसार अनन्त स्तब्ध शक्ति की प्रतिमा नारी है, क्योंकि कालान्तर में इन्हीं से संततियाँ उत्पन्न होकर जगन्माता के विकास में योग देती है। डॉ० हजारी प्रसाद द्विवेदी के अनुसार- ष्पुरुष निसंग है, स्त्री आसक्त पुरुष निर्धन है, स्त्री इन्दोन्मुखी। पुरुष मुक्त है, स्त्रीबद्ध है।’’

Published

2006-2025

Issue

Section

Articles

How to Cite

‘‘नारी चेतना पर विमर्श, मन्नू भंडारी कृत रचनाओं के सन्दर्भ में’’. (2024). Leadership, Education, Personality: An Interdisciplinary Journal, ISSN: 2524-6178, 17(6), 1-4. https://doi.org/10.1366/4gjsyy91