जैनेन्द्र युगीन सामाजिक परिस्थितियाँ

Authors

  • डाॅ0 विनय कुमार Author

DOI:

https://doi.org/10.1366/86436938

Abstract

अरस्तु के अनुसार समाज से विलग मानव या तो पशु है या देवता। अतः किसी भी युग में सर्जित साहित्य अपने परिवेश से संपृक्त होता है। साहित्यकार अपने परिवेश से संवेदनाएं ग्रहण करता है। उन्हें ही अपनी रचना में अभिव्यक्ति देता है, राजनीतिक, सामाजिक और साँस्कृतिक परिवर्तनों के मध्य वह अपनी चेतना पर परिवेश का दबाव अनुभव करता है, तभी यह परिवेश से गंभीर ढंग से जुड़ता है क्योंकि अपनी रचना में संजीवता और सार्थकता लाने के लिए यह आवश्यक है। परिवेश से जुड़ने के लिए कोई विशेष विधान नहीं है। यह रचनाकार के अपने स्वभाव और रुचि पर निर्भर है। 

Published

2006-2025

Issue

Section

Articles

How to Cite

जैनेन्द्र युगीन सामाजिक परिस्थितियाँ. (2024). Leadership, Education, Personality: An Interdisciplinary Journal, ISSN: 2524-6178, 17(3), 180-186. https://doi.org/10.1366/86436938