जहाँगीर कालीन चित्रकला पर यूरोपियन प्रभाव
DOI:
https://doi.org/10.1366/8cfb9c95Abstract
भारत का पाश्चात्य से सीधा सम्पर्क पुर्तगाल के साहसी पोत यात्री वास्कोडिगामा का इस देश के दक्षिण-पश्चिम समुद्र तट पर उतरने के पश्चात् (1498 ई) हुआ। निःसंदेह अप्रत्यक्ष रूप से यह सम्बन्ध पूर्व से विद्यमान था। यह कड़ी थल-मार्ग में कारवाँ पथ से पर्शिया एवं जल-मार्ग में अरब के माध्यम से गुजरात प्रदेश के व्यवसासियों के साथ स्थापित विकसित व्यापार में विद्यमान था। लेकिन जब सोलहवीं शताब्दी में पुर्तगालियों द्वारा कालीकट, कोचीन तथा गोवा में कारखाने स्थापित किये गये तो भारत के यूरोपीयकरण का सूत्रपात हुआ। इससे पूर्व भारतीय कला में पाश्चात्य तत्व के दृष्टिगत होने का अनुमान नहीं है। अकबर प्रथम मुगल सम्राट था जिसने यूरोप की कला एवं शिल्प में रूचि प्रकट की। जहाँगीर के शासनकाल में भी कई यूरोपीय व्यापारी, यात्री, ईसाई मिशनरी तथा राजदूत भारत में आये। इन राजदूतों में से कुछ राजदूत जहाँगीर के दरबार में कई वर्षों तक रहे। उन्होंने जहाँगीर के दरबार और तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों का अवलोकन किया। तत्पश्चात् उन्होंने अपने यात्रा विवरणों में जहाँगीर के शासनकाल में मुगल दरबार और भारत की तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों को रेखौंकित किया है।



