भारतीय अर्थव्यवस्था में व्यापार और विदेशी निवेश के योगदान का विश्लेषण

Authors

  •   Arpana Awasthi,  Dr Baburao Ananta Deshmukh Author

DOI:

https://doi.org/10.1366/hrys6545

Abstract

भारत में व्यापार और विदेशी निवेश ने आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, विशेष रूप से 1991 के सुधारों के बाद। व्यापारिक नीतियों में बदलाव और विदेशी निवेश के प्रोत्साहन से भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाई। विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) ने भारतीय उद्योगों में पूंजी, तकनीकी विकास और उच्चतम प्रबंधन कौशल का प्रवाह सुनिश्चित किया, जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई और भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार हुआ। इसके परिणामस्वरूप, भारतीय कंपनियों ने वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत की और भारतीय उत्पादों की वैश्विक बाजारों में स्वीकार्यता बढ़ी। विदेशी निवेश ने सेवा क्षेत्र, जैसे IT, BPO, और वित्तीय सेवाओं में भी तेज़ी से विस्तार किया, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को और अधिक समृद्धि प्राप्त हुई। व्यापार के सुधार ने भारत के निर्यात को बढ़ावा दिया, जिससे विदेशी मुद्रा अर्जन में वृद्धि हुई। इसके अलावा, व्यापार और विदेशी निवेश के परिणामस्वरूप रोजगार के नए अवसरों का सृजन हुआ, और भारतीय उद्योगों ने नवाचार, उत्पादकता, और तकनीकी विकास के माध्यम से अपनी वैश्विक स्थिति को सुदृढ़ किया। इस प्रकार, व्यापार और विदेशी निवेश ने भारतीय अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर किया और इसके दीर्घकालिक विकास को सुनिश्चित किया।

Published

2006-2025

Issue

Section

Articles

How to Cite

भारतीय अर्थव्यवस्था में व्यापार और विदेशी निवेश के योगदान का विश्लेषण. (2025). Leadership, Education, Personality: An Interdisciplinary Journal, ISSN: 2524-6178, 18(12), 1678-1689. https://doi.org/10.1366/hrys6545