हिन्दी साहित्य में महिलाओं से संबंधित सामाजिक मुद्दों का विश्लेषण
DOI:
https://doi.org/10.1366/csh4ey11Abstract
हिंदी साहित्य में महिलाओं से संबंधित सामाजिक मुद्दों का एक समृद्ध इतिहास रहा है। प्राचीन काल से ही, महिलाओं को समाज में विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, और इन चुनौतियों को हिंदी साहित्य में प्रमुखता से दर्शाया गया है। प्राचीन काल में, महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार नहीं थे। उन्हें शिक्षा, संपत्ति और राजनीतिक भागीदारी से वंचित रखा गया था। हिंदी साहित्य में, इस दौर की महिलाओं की स्थिति का चित्रण मिलता है, जिसमें उनकी पीड़ा, संघर्ष और सामाजिक बंधनों का वर्णन है। मध्यकाल में, महिलाओं की स्थिति में कुछ सुधार हुआ, लेकिन फिर भी उन्हें कई सामाजिक बुराइयों का सामना करना पड़ा, जैसे कि बाल विवाह, सती प्रथा और पर्दा प्रथा। हिंदी साहित्य में, इस काल की महिलाओं के साहस, बलिदान और संघर्ष की कहानियाँ मिलती हैं। आधुनिक काल में, महिलाओं की स्थिति में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। उन्हें शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी के अवसर मिले हैं। हालांकि, आज भी उन्हें कई सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि लैंगिक भेदभाव, हिंसा और उत्पीड़न। हिंदी साहित्य में, आधुनिक महिलाओं की आकांक्षाओं, चुनौतियों और संघर्षों का चित्रण मिलता है।



