प्राथमिक क्षेत्र के विकास में बैंको की भूमिका

Authors

  • पिंकी देवी डाॅ0 दिपाली सचदेवा Author

DOI:

https://doi.org/10.1366/4ex87f05

Abstract

भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार श्प्राथमिक क्षेत्रश् है। जिसमें कृषि, कृषि से सम्बन्धित क्रियाएं लघु-कुटीर व ग्रामीण उद्योग, खुदरा व्यापार, लघु व्यवसाय तथा पशुपालन, मछली पालन व वनों पर आधारित लट्ठा उद्योग तथा अन्य प्राथमिक क्षेत्र की क्रियाओं को शामिल किया जा सकता है। यही कारण है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में प्राथमिक क्षेत्र का योगदान महत्वपूर्ण रहा है तथा भविष्य में भी महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। भारत में जनसंख्या का लगभग 75 प्रतिशत भाग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से प्राथमिक क्षेत्र से ही अपना जीवन निर्वाह कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो लगभग 90 प्रतिशत ग्रामीण जनसंख्या प्राथमिक क्षेत्र पर ही निर्भर है। प्राथमिक क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का केन्द्र बिन्दु है जिससे खाद्यान्न, औद्योगिक कच्चा माल, रोजगार, पशुधन, आर्थिक क्रियाएं एवं उनके कृषि उत्पादों की प्राप्ति होती है। भारत में लगभग 100 करोड़ जनसंख्या के खाद्यान्न की पूर्ति एवं 36 करोड़ पशुधन के लिए चारे की पूर्ति प्राथमिक क्षेत्र द्वारा की जाती है। भारत में ग्रामीण व अर्द्धशहरी क्षेत्रों में रोजगार का प्रमुख स्रोत प्राथमिक क्षेत्र ही है। औद्योगिक क्षेत्र में कच्चे माल की पूर्ति में भी प्राथमिक क्षेत्र का प्रमुख स्थान है। कुछ उद्योग तो कच्चे माल के लिए पूर्ण रूप से इसी क्षेत्र पर निर्भर है जैसे सूती कपड़ा उद्योग, जूट उद्योग, वनस्पति उद्योग, चीनी उद्योग, गाय योग, तेल उद्योग एवं डेयरी उद्योग आदि।

 

Published

2006-2025

Issue

Section

Articles

How to Cite

प्राथमिक क्षेत्र के विकास में बैंको की भूमिका. (2025). Leadership, Education, Personality: An Interdisciplinary Journal, ISSN: 2524-6178, 18(12), 1899-1903. https://doi.org/10.1366/4ex87f05