बैंक साख की प्राथमिक क्षेत्र में भ्ूामिका: जींद जिले का आलोचनात्मक अध्ययन

Authors

  • पिंकी देवी डाॅ0 दिपाली सचदेवा Author

DOI:

https://doi.org/10.1366/y4d44y77

Abstract

भारतीय अर्थव्यवस्था में प्राथमिक क्षेत्र के पिछड़ेपन का एक महत्वपूर्ण कारण इस क्षेत्र से संबंधित लोगों के पास पूँजी का अभाव है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र में तो आज भी वित्तीय स्रोत का मुख्य साधन गैर संस्थागत स्रोत ही है। गाँव के साहूकार तथा जमींदारों के द्वारा किसानों तथा कमजोर वर्गों का आज भी शोषण किया जा रहा है। दूसरी तरफ ग्रामीण तथा अर्द्धशहरी क्षेत्रों में सरकार आज प्रारम्भ किए गए ग्रामीण विकास से संबंधित अधिकतर कार्यक्रमों को सफलता पूर्वक क्रियान्वन नहीं किया जा सका है। परिणामस्वरूप प्राथमिक क्षेत्र का विकास जिस मात्रा एवं गति से होना चाहिए था, उसके अनुसार नहीं हो सका तथा प्राथमिक क्षेत्र से संबंधित लोगों में निर्धनता का विस्तार होता गया। ष्यद्यपि 1951-52 की अपेक्षा वर्तमान में गैर संस्थागत स्रोतों के द्वारा प्रदान किये जाने वाले भाग की मात्रा 92.7 प्रतिशत से घटकर 48 प्रतिशत के लगभग हो चुकी है। फिर भी इस भाग को कम नहीं माना जाना चाहिए। इसका अर्थ यह हुआ कि वर्तमान समय में भी ग्रामीण व अर्द्धशहरी भागों में साख पूर्ति का प्रमुख स्रोत गैर संस्थागत ही है।ष्

 

Published

2006-2025

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Articles

How to Cite

बैंक साख की प्राथमिक क्षेत्र में भ्ूामिका: जींद जिले का आलोचनात्मक अध्ययन. (2025). Leadership, Education, Personality: An Interdisciplinary Journal, ISSN: 2524-6178, 18(12), 1904-1909. https://doi.org/10.1366/y4d44y77