21वीं सदी के युवा कहानीकारों की कहानियों में आतंक विरोधी स्वरः- एक विवेचन
DOI:
https://doi.org/10.1366/24mvx653Abstract
आज न केवल भारत बल्कि सम्पूर्ण विश्व के समक्ष एक बहुत बड़ी चुनौती के रूप में जो समस्या खड़ी है। वह है, आतंकवाद। और सारा विश्व आज आतंकवाद से भयभीत है। भारत लगातार पिछले तीन दशकों से आतंकवाद की समस्या से जूझ रहा है। परन्तु पिछले दशक में यह घटनाएं जिस तरह से घटित हुई पूरा राष्ट्र सीरियल बम विस्फोटों से थर्रा उठा। गुजरात, वाराणासी, संसद भवन, मुंबई लोकल ट्रेन में क्रमबद्ध बम बलास्ट, होटल ताज व नरीमन हाऊस पर आतंकवादी हमले दिल्ली, मुम्बई, गुजरात, अहमदाबाद, जयपुर, अजमेर, मक्का मस्जिद में हुए सीरियल बम विस्फोट हमारे देश की सुरक्षा व्यवस्था और कानून व्यवस्था को जहाँ नकारा साबित करते हैं वहीं सम्पूर्ण देश की आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक प्रगति की गति को अवरूद्ध करने में संलग्न है। यहां तक कि ‘‘आतंकवादी अपने लक्ष्य में और आतंक फैलाने की नई-नई विधि खोज निकालने में भी सफल हो रहे हैं। आतंकवादी हमलों के कारण पूरी मानवता के भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है। आतंकवाद एक प्रयोग या हिंसा की धमकी है जिससे एक समूह व्यक्ति अथवा सरकार को अपनी माँग मंगवाने और प्रचार की ओर अधिकतम आकर्षित करने के लिए विवश किया जाता है’’।1



