भारतीय लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियाँ

Authors

  • Dr. Neelam Author

DOI:

https://doi.org/10.1366/f6ec4n94

Abstract

 

भारतीय लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जो संविधान में निहित मूल्यों जैसे समानता, स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता और न्याय पर आधारित है। हालांकि, आज यह कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है जो इसकी मजबूती और विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं। राजनीति का अपराधीकरण लोकतंत्र की पवित्रता को कमजोर करता है, जहाँ आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेता सत्ता में आ जाते हैं। इसके साथ ही, भ्रष्टाचार प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की भावना को क्षीण करता है। जाति, धर्म और भाषा के आधार पर सामाजिक विभाजन और धार्मिक असहिष्णुता समाज को बाँटने का कार्य करते हैं, जिससे सांप्रदायिक तनाव और सामाजिक असमानता बढ़ती है। मीडिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बढ़ते नियंत्रण लोकतांत्रिक संवाद को दबाते हैं और जनता की आवाज कमजोर होती है। संवैधानिक संस्थाओं पर कार्यपालिका के हस्तक्षेप से उनकी स्वायत्तता प्रभावित होती है, जो लोकतंत्र के संतुलन के लिए हानिकारक है। इन समस्याओं का समाधान नागरिक जागरूकता, नैतिक राजनीति, स्वतंत्र संस्थाएँ और समावेशी विकास के माध्यम से संभव है। यदि इन चुनौतियों का समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो लोकतंत्र केवल एक औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह जाएगा। अतः एक उत्तरदायी, सक्रिय और सजग नागरिक समाज की भूमिका अत्यंत आवश्यक है।

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2006-2025

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Articles

How to Cite

भारतीय लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियाँ. (2025). Leadership, Education, Personality: An Interdisciplinary Journal, ISSN: 2524-6178, 17(9), 132-142. https://doi.org/10.1366/f6ec4n94