भारतीय ज्ञान परम्परा में आत्मा का स्वरूप: स्वामी विवेकानन्द के विशेष संदर्भ में

Authors

  • डाॅ॰ हरि ओम फुलिया Author

DOI:

https://doi.org/10.1366/asqxr156

Abstract


स्वामी जी पुनर्जन्म के विषय में भारतीय परम्परा के हिमायती हैं ओर कर्म सिद्धान्त को इसका मूल मानते हैं, परन्तु विचारशील मनीषी एवं विकासवादी युग में होने के कारण उन्होंने इस सिद्धान्त को विवेकसंगत बनाने के लिए समन्वयवादी दृष्टिकोण अपनाया और विचारकों के लिए दोनों विकल्प खुले रखे हैं । वस्तुतः आत्मा के पृथक अस्तित्व के बिना पुनर्जन्म-सिद्धान्त सम्भव भी नहीं है यह बात वे भली-भाँति समझते थे ।

Published

2006-2025

Issue

Section

Articles

How to Cite

भारतीय ज्ञान परम्परा में आत्मा का स्वरूप: स्वामी विवेकानन्द के विशेष संदर्भ में. (2025). Leadership, Education, Personality: An Interdisciplinary Journal, ISSN: 2524-6178, 18(10), 735-743. https://doi.org/10.1366/asqxr156