सम्राट अशोक के धम्म का सामाजिक और ऐतिहासिक महत्व
DOI:
https://doi.org/10.1366/qkdsng11Abstract
विश्व के इतिहास में सम्राट अशोक का यश सम्राट के राज्य विस्तार और शासन की क्षमता के कारण प्राप्त नहीं हुआ बल्कि सम्राट के उच्च धार्मिक आदर्श उसके प्रति सम्राट अशोक की आस्था और उसको व्यवहार में लाने हेतु लगन और योग्य व्यवस्था पर आधारित है । सम्राट का व्यक्तिगत धर्म बौद्ध धर्म था । सम्राट का धम्म किसी धर्म से संबंधित नहीं था और नहीं वह मनमाने तौर पर बनाया गया सिद्धांत था । धम्म का संबंध संस्कृत भाषा में धर्म शब्द का प्राकृतिक रूपांतरण है । धम्म धर्म और ब्राह्मंण की प्राकृतिक व्यवस्था को बनाए रखता है। मानव को भावनाओं की शुद्धता और पवित्रता के लिए साधुता बहुकल्याण, दया ,दान, सत्य संयम कृतज्ञता और माधुर्यपूर करना हैसम्राट के लिए धम्म का विशेष महत्व था । सम्राट के अधिकांश अभिलेख का मुख्य उपजीव्य धम्म हीं है। धम्म सर्वाग्रही या सार्वभौमिक धर्म था जो सभी धर्मों की साझी संपत्ति है । सम्राट की धम्मनीति उसके द्वारा स्थापित किए गए सुव्यवस्थित साम्राज्य में एकता स्थापित करने के उद्देश्य से अपनाई गई थी । धम्म धार्मिकता के रूप में नहीं बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व की एक वृति के रूप में देखा जाता है । धम्मविधान का पालन करके मानव समाज सुखी , निरोगी तथा स्वयं को सुरक्षित महसूस करता था । सम्राट अशोक के साम्राज्य की संपूर्ण प्रजा धम्म का आदर और सम्मान के साथ पालन करती थी।



