भारत के ऐतिहासिक जनजातीय आंदोलन: संघर्ष और स्वाभिमान की कहानी

Authors

  • डॉ. लक्ष्मी देवी सैनी Author

DOI:

https://doi.org/10.1366/qdyxnm86

Abstract

भारत के प्रमुख जनजातीय आंदोलन आदिवासी समाज की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान की रक्षा के लिए उभरे संघर्षों का प्रतीक हैं। ये आंदोलन ब्रिटिश काल से लेकर आधुनिक भारत तक जारी रहे हैं और विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग रूपों में सामने आए हैं। संथाल विद्रोह, भील आंदोलन, मुंडा उलगुलान, टाना भगत आंदोलन, रामपा विद्रोह जैसे आंदोलन आदिवासियों के साहस, संगठन और नेतृत्व की मिसाल हैं। स्वतंत्रता के बाद झारखंड, गोंडवाना, बोडो और नर्मदा बचाओ जैसे आंदोलन इस बात का प्रमाण हैं कि जनजातीय समुदाय आज भी जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए संघर्षरत हैं। इन आंदोलनों ने न केवल स्थानीय शोषण के विरुद्ध चेतना जगाई, बल्कि राष्ट्रीय नीतियों को भी प्रभावित किया। इनका योगदान भारत के लोकतांत्रिक, सामाजिक न्यायपूर्ण और बहुलतावादी ढांचे को सुदृढ़ करने में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।

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Published

2006-2026

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Articles

How to Cite

भारत के ऐतिहासिक जनजातीय आंदोलन: संघर्ष और स्वाभिमान की कहानी. (2026). Leadership, Education, Personality: An Interdisciplinary Journal, ISSN: 2524-6178, 18(7), 101-111. https://doi.org/10.1366/qdyxnm86