उत्तरमेघ में वर्णित यक्ष के सन्देश में निहित कालिदास का भाव पक्ष
DOI:
https://doi.org/10.1366/fpshm445Abstract
महाकवि कालिदास द्वारा रचित मेघदूत सम्पूर्ण संस्कृत साहित्य का श्रेष्ठतम गीतिकाव्य है। इस काव्य में निर्वासित जीवन जी रहे एक यक्ष ने, सुदूर निवासिनी अपनी प्रियतमा यक्षिणी के लिए मेघ के माध्यम से प्रेम सन्देश प्रेषित किया है। कालिदास को यह भली-भाँति ज्ञात था कि धुएँ, जल और आकाश से निर्मित निर्जीव चेतनाशून्य तत्त्वों से बना मेघ, चेतन प्राणियों के द्वारा प्रेषणीय सन्देश को ले जाने में सक्षम नहीं हो सकता। उधर यक्ष व्यथित है, उसे दूसरा कोई मार्ग नहीं सूझता। इसलिए वह मेघ को ही अपनी प्रियतमा के पास दूत रूप में संदेश प्रेषित करने का निर्णय लेता है। कालिदास लिखते हैं-



