होजरी उद्योग के इतिहास और वर्तमान स्थिति का अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.1366/60pzvk53Abstract
होजरी उद्योग, जो कपड़ों के एक विशिष्ट वर्ग को समर्पित है, भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह उद्योग न केवल रोजगार सृजन में योगदान देता है बल्कि देश के निर्यात राजस्व में भी वृद्धि करता है। हाल के वर्षों में, वैश्वीकरण और तकनीकी परिवर्तनों के कारण होजरी उद्योग ने कई बदलावों का सामना किया है। होजरी उद्योग एक ऐसा उद्योग है जिसने सदियों से मानव जीवन को आराम और फैशन प्रदान किया है। यह उद्योग कपड़ों के उन छोटे-छोटे टुकड़ों का निर्माण करता है जो हमारे शरीर के विभिन्न हिस्सों को ढकते हैं और उन्हें गर्म रखते हैं। भारत में, विशेषकर लुधियाना शहर, होजरी उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। होजरी उद्योग का आरंभ प्राचीन काल से माना जाता है। जब मनुष्य ने पत्तों और जानवरों की खाल से अपने शरीर को ढकना शुरू किया, तब से ही कपड़ों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। समय के साथ, बुनाई की तकनीक विकसित हुई और लोगों ने विभिन्न प्रकार के कपड़े बनाने शुरू किए। भारत में, होजरी उद्योग का विकास ब्रिटिश शासनकाल के दौरान हुआ। ब्रिटिशों ने भारत में कपड़ा उद्योग को बढ़ावा दिया और कई कपड़ा मिलें स्थापित की गईं। इन मिलों में सूती कपड़े के साथ-साथ ऊनी कपड़े भी बनाए जाते थे। स्वतंत्रता के बाद, भारत सरकार ने स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियां बनाईं और होजरी उद्योग भी इन नीतियों से लाभान्वित हुआ।



